जय सतनाम साहित्यकार अनिल कुमार पाली जी रचना- बाबा गुरुघासीदास के विचार ल संजो के राखने वाला हे सतनामी

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बाबा गुरुघासीदास के विचार ल संजो के राखने वाला हे सतनामी
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बाबा गुरुघासीदास के विचार ल संजो के राखने वाला हे सतनामी

मय तोला जानेव तय मोला जान रे जोगी,
जिनगी के पगडंडी ल थोड़कीं बस मान रे संगी।
कोन जानी कब सिरा जाये ये मन के जोड़ी,
मया पिरित ले सब ल अपन मान रे संगी।

कहिथे के जिन्हा भी अत्याचार होथे अधिकार के हनन होथे उंहा एक न एक दिन मनखे ह अपन अधिकार बर जरूर जागथे, अउ फेर अइसने जगाथे की अपन अलग पहिचान बनाये के संगे-संग अपन पूरा समाज ल जगा देथे, अइसने हमर परम पूज्य बाबा गुरू घासीदास जी के विचार रहिस हे, जिनखर विचार के उंखर मुख से निकल के जन-जन के विचार बन गे, अउ वोही विचार ल लेके बाबा ह सब्बो मनखे ल एक समान अधिकार दे के लड़ाई म सबले आघु आगे, अउ उंखर विचार ल सुन के सब्बो मनखे मन अपन अधिकार बर सकलाय ल सुरु होगे। काबर की जब येक महान आत्मा ह ये धरती म जनम लेथे त अपन संग म नवा बदलाव ले के आथे जेखर से मनखे मन के कल्याण जरूर होथे।

मनखे मनखे एक समान- बाबा गुरु घासीदास जी के विचार सब्बो मनखे मनखे एक समान ह सब्बो मनखे के करेजा म उतर के सब्बो मनखे ल एक संग जोड़े के बढ़ बुता करे हे, जेन भी मनखे ह समाज ह बाबा गुरु घासीदास जी के विचार ल अपन करेजा म उतार लिस वो मनखे अउ समाज ल आघु बड़े ले कोनो भी विरोधी नइ रोक सके, काबर की जिन्हा सब ल इक्के आंखी ले देखे जाथे उंहा कोनो ल बड़े-छोटे नइ समझे जाए, अउ जिन्हा सब्बो इक्के समान रहिथे उंहा पुन आत्मा मन निवास करथे,

सत्य के रददा म चलाइया सतनामी- बाबा गुरू घासीदास ह सदा सत्य के रददा म रेंगें हे, अउ मनखे मन ल गलत रददा ल छोड़ के सत के रददा म रेंगवाये बर अब्बड़ परयास घलोक करे हे, जेन भी मनखे ह सत के रददा म रेंगथे, सदा सत्य के नाव लेथे, वही मनखे ह  ल सतनामी हे, बाबा के बोले गोठ ल सुमर के मनखे ह अपन जीवन म उतार लिस त वो मनखे के सबो दुख दूर हो जही, कोनो भी मनखे ल छोटे बड़े समझ के ओखर से बुरा व्यवहार करना, के बड़े मनखे समझ के वोला पूजना ये गलत हे येही सब गोठ ल समझ के बाबा के विचार ल आघु बढ़ाने वाला मनखे ही सही म सतनामी हे।

अनिल कुमार पाली, तारबाहर बिलासपुर छत्तीसगढ़
मो न- 7722906664

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